Saturday, 7 July 2012

अख़बारों में आजकल हिग्स बोसोन की चर्चा जोरों पर है ! एक आम आदमी को लगता है कि पश्चिमी देशों का विज्ञान ईश्वर को खोजने में कामयाब होने वाला है ! 'ऐसा होने पर क्या होगा'  पर चर्चाएँ गर्म होने लगी हैं !

   ऐसे में एक सोच उठती है कि ईश्वर आखिर है क्या और इस दुनिया के इतिहास में उसका क्या योगदान है !

   भौतिक दुनिया और भौतिक शरीर को कम्प्यूटर के उदाहरण से समझते  हैं ! कम्प्यूटर का की-बोर्ड ,स्क्रीन,प्रिंटर,माउस,वेब-कैम,स्पीकर आदि शरीर के अंगों की तरह हैं जो सी.पी.यू. यानि दिमाग के निर्देशन पर बहुत से काम करते हैं जिनके बारे में हम सब जानते हैं ! यह सी पी यू अपने आप नहीं चलता,इसे चलाने के लिए इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम लोड करना पड़ता है जिसका काम हमारे शरीर में आत्मा के जैसा है ! पूरी तरह तैयार कंप्यूटर को चलाने के लिए लगातार बिजली की जरुरत है तो इसी तरह इस शरीर को चलाने के लिए भी नियमित आहार की जरुरत है ! और आगे बात करें तो वायरस दोनों को बीमार करता है और एंटी वायरस दोनों को बीमारी से बचाता है, संक्षेप में हार्डवेयर शरीर और सॉफ्टवेयर आत्मा है !

   अब आते हैं ईश्वर पर ! कंप्यूटर की सहायता से चिकित्सा,शिक्षा और जीवन के अन्य क्षेत्रों में बेहद सकारात्मक बदलाव आये हैं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है लेकिन साथ ही कंप्यूटर के ही प्रयोग से बहुत से अपराध और अन्य मानवता विरोधी घिनौने कामों को अंजाम दिया जाता है ! ऐसा क्यों होता है ???

  जिस तरह कंप्यूटर पर होने वाले कार्य की प्रकृति यूजर की मर्जी से तय होती हैं उसी तरह इंसान के द्वारा किये जाने वाले कार्य की प्रकृति उसके विचार तय करते हैं ! जिन विचारों ने विभिन्न सभ्यताओं को पनपने और कायम रखने में अहम् भूमिका निभाई उनका संकलन धर्मग्रंथों के रूप में हमारे साथ है और जिन लोगों ने वे विचार दिए उन्हें सभ्यताओं ने ईश्वर का प्रतिनिधि माना ! मैं इस निकर्ष पर पहुंचा हूँ कि मानवता की भलाई  की भावना ही ईश्वर है जो हमारे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को कंट्रोल करती है जैसे हम अपने कंप्यूटर को कंट्रोल करते हैं ! एक दूसरी भावना भी है दुनिया में और उसके कार्य दुनिया को नुकसान पहुंचाते हैं ! धर्मग्रंथों के  अनुसार वह शैतान है !

  दोस्तों,एक कंप्यूटर यह तय नहीं करता कि यूजर कौन होगा लेकिन इंसान खुद तय कर सकता है कि अपना कंट्रोल किसके हाथ में रखना है ! अगर आपके जीवन से मानवता का फायदा हो रहा है तो आपका कंट्रोल ईश्वर के हाथ मैं है और अगर विपरीत है तो यूजर बदल डालो !

  अब बात करते हैं विज्ञान की...  विज्ञान एक प्रक्रिया है जिसमें परिकल्पना,प्रयोग,परिणाम और परिणामों की एकरूपता से प्रमाण मिलता है जिसे विशिष्ट ज्ञान या विज्ञान मान लिया जाता है ! हिग्स बोसोन की खोज इस दुनिया में पहले से मौजूद एक तत्व की खोज है जिसका निर्माण किन परिस्थितियों में संभव हुआ यह प्रयोग द्वारा स्थापित हुआ है जिसका ईश्वर से कोई वास्ता नहीं है क्योंकि ईश्वर तो एक विचार है, एक भावना है,एक विश्वास है जिसने मानव को आज तक कायम और एकजुट रखा है !

  आध्यात्म भी एक ज्ञान है जिसने हमें ईश्वर के अस्तित्व को मानना और एक समाज के रूप में रहना सिखाया है और इस ज्ञान के सहारे मानव सभ्यता ने हजारों वर्ष की अपनी यात्रा सफलता पूर्वक तय की है ! माना कि धर्मग्रंथों में लिखे कुछ प्रसंग काल्पनिक प्रतीत होते हैं लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि  धर्मग्रन्थ की रचना एक तत्कालीन व्यक्ति ने तत्कालीन परिस्थितियों में तत्कालीन समाज को ईश्वरीय विचारों की जानकारी देने के लिए की और यदि समाज आज कायम है तो उनका प्रयास सफल है !

  विज्ञान ने अपने कुछ सौ साल के इतिहास में मानव जाति का जितना भला किया है उससे कई गुना अधिक मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरे उत्पन्न किये हैं !हिग्स बोसोन की खोज पर बात करें तो जितने वैज्ञानिक,जितने संसाधन और जितना पैसा इस प्रयोग पर लगाया गया उतने में दुनिया के बहुत सारे लोगों की जिंदगी बेहतर बनाई जा सकती थी...इस दुनिया के कर्णधारों को सोचना चाहिए कि अधिक महत्वपूर्ण क्या है ????

   एक सवाल सारी दुनिया से :- विज्ञान का उपयोग इंसान के आज और आने वाले कल को बेहतर बनाने में होना चाहिए या फिर अतीत के सवालों पर माथापच्ची में ??????????????????????

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